वजूद मेरा
इस नशीली झील सा ।
न हलचल
शांत हैं
वजूद मेरा
इस निर्दयी झील सा ।
लील गयी
कितना जल
कितने अरमान
इस निर्मोही झील सा ।
शांत हूँ
दफ़न किये
लाखों अरमान
इस बेदर्द झील सा ।
भावनाओं को शब्द आकार देते हैं, जुबान कभी शब्दों को बयां नहीं कर पाती, उन पलों को सहेजना ही कविता हैं. अनकहें पलों और जज्बातों को उकेरना ही सुकून देता हैं. सच बोलने और सहने का साहस आज किसी में नहीं, बस इसीलिए जो महसूस करो, उसे उकेर दो कागज पर

आ कर