दूर कहीं
इस नीले नभ में
खो जाऊंगा
फिर कहीं
इस नीले नभ में
उब गया हूँ
ऐ जिन्दगी
अब तुझसे
खो जाना चाहता हूँ
इसी नभ में
इक पाखी सा
भावनाओं को शब्द आकार देते हैं, जुबान कभी शब्दों को बयां नहीं कर पाती, उन पलों को सहेजना ही कविता हैं. अनकहें पलों और जज्बातों को उकेरना ही सुकून देता हैं. सच बोलने और सहने का साहस आज किसी में नहीं, बस इसीलिए जो महसूस करो, उसे उकेर दो कागज पर

आ कर