संगी मेरे
तुझ बिन ।
इक पल
अंधियारी जिंदगानी में
झांक गए तुम
मीत मेरे
काटना ही हैं
सफ़र
मुझे तो तनहा
सुकून देता
कोई
बस इक पल का.
भावनाओं को शब्द आकार देते हैं, जुबान कभी शब्दों को बयां नहीं कर पाती, उन पलों को सहेजना ही कविता हैं. अनकहें पलों और जज्बातों को उकेरना ही सुकून देता हैं. सच बोलने और सहने का साहस आज किसी में नहीं, बस इसीलिए जो महसूस करो, उसे उकेर दो कागज पर

आ कर