
फ़िर चुपके से
ख्वाबों को सजा गया कोई
हौले से कानों में
गुनगुना गया कोई
मुद्दत से तरस रहे थे जिनके दीदार को
एक झलक दिखला गया कोई
वादा तो था गुप्तगू का
लेकिन सिर्फ़ मुस्करा गया कोई
इस जनम तरसा करे जिनके संग को
अगले सात जनम हमारे नाम लिख गया कोई
भावनाओं को शब्द आकार देते हैं, जुबान कभी शब्दों को बयां नहीं कर पाती, उन पलों को सहेजना ही कविता हैं. अनकहें पलों और जज्बातों को उकेरना ही सुकून देता हैं. सच बोलने और सहने का साहस आज किसी में नहीं, बस इसीलिए जो महसूस करो, उसे उकेर दो कागज पर

आ कर