आओगे
या यूँ ही
इंतज़ार में
मुझे तनहा
छोड़ जाओगे
बसंत गया
पतझड़ आया
लेकिन
तू न आया
आओगे कब
या यूँ ही सताओगे
राहो में मुझे
तनहा छोड़ जाओगे
भावनाओं को शब्द आकार देते हैं, जुबान कभी शब्दों को बयां नहीं कर पाती, उन पलों को सहेजना ही कविता हैं. अनकहें पलों और जज्बातों को उकेरना ही सुकून देता हैं. सच बोलने और सहने का साहस आज किसी में नहीं, बस इसीलिए जो महसूस करो, उसे उकेर दो कागज पर
आ कर