शनिवार, 13 मार्च 2010

छुपा लो नयनों में ... प्रीत मेरी

नयन आइना हैं
मेरी प्रीत का
छुपा लो कितना भी
लबों पर आती प्रीत मेरी
कर लो कैद कितनी भी
दिल में प्रीत मेरी
कह देंगे सब कुछ
तेरे नयना
प्रीत मेरी .

2 टिप्‍पणियां:

संजय भास्कर ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com
caryo

शालिनी कौशिक ने कहा…

बहुत सुन्दर भावना से भरी पोस्ट.मेरे ब्लॉग कौशल पर भी आपका हार्दिक स्वागत है...